Sunday, February 12, 2017

21. एक नई ज़ुबान गढ़ी जा रही थी

जब चला था
ख़्वाब था मन में -
एक देश बनाऊँगा
हँसते-खेलते फूल-सा
तुम हँसोगे पर सच है कि मैं कविताएँ लिखता था
मानता था कि कविताएँ ही देश बनाएँगी
ख़्वाब था कि माहताब छाएगा देश की रातों पर
दुखी लोग भली नींद सो जाएँगे
सुख के सपने हो जाएँगे

ख़्वाब बदला और
चाहत हुकूमत की आ बैठी दिलो-दिमाग पर
भेड़-बकरों जैसे दिखने लगे देश के लोग
मैं सोचने लगा कि इनकी नियति ही रौंदे-लूटे जाने की है
इस तरह आईने में हर रोज़ देखा खुद को
इंसान से कीट बनते हुए
रेंगते हुए मैंने की अपनी तीर्थयात्रा
और आका को नतमस्तक किया सलाम।

मैंने देशनिकाला दिया खुद को
अपने ख़्वाबों के देश से
या कि देश ही निकल गया था ख़्वाब से
खंडहर मौजूद था या कि ज़मीं जिसे अब मेरे हाथों खंडहर होना था
चीखें थीं चारों ओर और मेरे सिपहसालारों की ललकारें
एक नई ज़ुबान गढ़ी जा रही थी

कि ख़्वाब देखना वतन के साथ गद्दारी है

देश से निकाले गए खुद का यह विलाप
सुनता हूँ खुद ही छिप-छिप कर।

In the beginning
There was the dream
That I will build a Nation -
Happy like a flower
You may be amused but I really used to write poems
I used to believe that poetry will build the Nation
I dreamt that moonlight will pour on the Nation in the nights
And that suffering people will sleep a good night
And they will have happy dreams

And then my dream changed
The desire to rule occupied my mind and heart
And suddenly the people appeared like sheep
And I thought that they are destined to be robbed
That is how I saw myself in the mirror everyday
metamorphosing from a human into an insect
I crawled for pilgrimage to holy places
And I fell on the feet of my Master.

I exiled myself
From the country of my dreams
Or may be the country was no longer there in my dreams
There were ruins or what were to become ruins in my hands
There were screams all around and the thundering voices of my foot-soldiers
They were designing a new language 

That to dream is an act of treason

I listen secretly to this mourning
Of my exiled self.

Monday, February 06, 2017

20. बम लहरी बम लहरी नाचें दरबारी

हुकूमत का नशा मुझपर है सवार हर पल
अकेला
खुद को गलबँहियों में लेता
जैसे कोई नाटक की कला हो सीखता
सालों से इतिहास की गति के खिलाफ जद्दोजहद की
एक से एक हसीन नज़ारे करता रहा दरकिनार
एक ही ध्येय था
बचपन से बुनी अंधकार की चादर उड़ेल दूँ
ढक लूँ धरती का हर चप्पा इस तरह 
कि कहीं भी खालिस ज़मीं के टुकड़े पर चलना न पड़े मुझे

सड़कें धधक उठें जब चलूँ उन पर
दुरुस्त दिमाग जल कर राख हो जाएँ
मेरी चाल में हों तांडव के ताल
जाएँ खो जाएँ तबाह हो जाएँ
बचपन के दोस्त, सखा सब
मेरे अमात्य फरमान जारी करें जब
नाचता रहूँ नशे में धा धिन
मेरा नशा आच्छन्न करे सैंकड़ों को
सामूहिक थापों में आवाज़ें घनघोर घरघराती
बम लहरी बम लहरी नाचें दरबारी

खुद को गलबँहियों में लिए
बन जाऊँ घना काला बादल।

I am high on power every moment
I alone
Embracing myself
As if learning the craft of performance
For years I have struggled against the trajectories of history
I ignored pretty sights one after another
I had a singular target
That I must spread the sheet of darkness that I am weaving since my childhood
I must cover every inch on Earth
That I must not walk on any spot that remains from Nature

The roads that I walk on must glow in intense heat
Healthy minds must burn into ashes
My dance must generate the apocalypse beats
All must go,
My childhood friends, my loved ones, must annihilate
When my minister issues the ordinance
While I dance high onto the beats
My frenzy must pass on to millions
Dark and deep murmurs
in tune with collective beats
Da dum da da dum da da dum my followers dancing

Embracing myself in my own arms
I must become the darkest cloud in the sky.

Thursday, January 26, 2017

चुपचाप अट्टहास: 19. प्यार की थाप के साथ मेरी फुँफकार साथ चलती

खुशी तुम्हारी कि तुम लड़ते हो
मरते हो

मेरी सारी कोशिशों के बावजूद
बिजली की कौंध में चमक उठती हैं तुम्हारी आँखें
तुम्हारे होंठों से निकलता है लफ्ज़ 'प्यार'
पल भर में जल गई खंडहर हो चुकी वादियाँ हरी हो जाती हैं
उत्सव के ढोल बजने लगते हैं

काले बादलों से घिरी अटारी से देखता हूँ
और फिर एकबार आग की लहरें उड़ेल देता हूँ
तुम्हारा दिल धड़कता है
प्यार की थाप के साथ
मेरी फुँफकार साथ चलती
गुत्थम-गुत्था होते रहते हम तुम।

You are happy with your resistance

Happy in being demolished

In spite of all my moves
Your eyes shine with lightning
Your lips utter the word ‘love’
And in a moment ruined valleys turn green
Merry beats reverberate all around

I see it from my penthouse surrounded by dark clouds
And once more I let fire rage
Your heart beats
With the march of love
My venomous panting goes with it
We are in a battle.

Wednesday, January 18, 2017

18. हर रात अब अमावस की रात होगी

फरिश्तों से कह दो
 

वे अब न आएँ
 

वे तुम्हारा हाथ नहीं थाम पाएँगे
 

मैंने सारी धरती पर काँटेदार बाड़े लगा दिए हैं
 

हर प्रवेशद्वार पर नुकीले त्रिशूल लिए खड़े हैं
 

चिलम सी धधकती आँखों वाले प्रहरी

 

चाँद को रोक दिया है मैंने
 

हर रात अब अमावस की रात होगी

 

कोई जादू, ताबीज़, मंत्र-तंत्र काम नहीं आएगा
 

कापालिक रक्तपिपासु मेरे साथ हैं
 

सभी मठों पर कब्जा है
 

मेरे अवधूतों का
 

हर धाम ख़ून की आरती चढ़ाई जाती है मेरे आका को।

 

Send a word to the angels
 

They must not visit any more
 

They will not be able to hold your hand
 

I have put a barbed fence all around the Earth
 

Sentries with glowing pot like eyes
 

Guard every entrance with pointed tridents 

 

I have stopped the moon
 

It will be a new moon every night now

 

No magic, amulets, tantra or spells will work
 

The bloodthristy skull-carriers are with me
 

The ascetics I own rule all monasteries
 

My master is worshipped in each of them
 

With blood servings.

Sunday, January 15, 2017

17. ऐसी ही कविता लिखनी है मुझे


मेरे पूर्वसूरी कविता लिखते थे

मैंने कोशिश की

और जाना कि

जिस अँधेरे में हूँ वहाँ

कविता नहीं होती।

गुस्से में हाथ आई सभी कविता की किताबें

फाड़ कर आग में जला दीं


जलते कागज में से कोई आवाज़

-आ कह जाती

कि जहाँ प्यार नहीं

वहाँ कविता नहीं होती।

मैंने कल्पना में दुनिया की

सबसे खूबसूरत औरत को देखने की कोशिश की।

हड्डियों का ढाँचा वह आती

होंठों में काला पड़ा ख़ून

कोशिश की कि उसे मुस्कराता देखूँ

होंठ खुलते दिखते उसके विषैले दाँत

वह चबाती कागज़ के पन्ने

जिन पर बेहतरीन कविताएँ लिखी होतीं।

सोचा कि उसके उन्माद पर कविता लिखूँगा

कपड़े उतार कर

उसके वक्ष नितंब देखूँगा

पर उसका शरीर काँटेदार रोंओं से भरा था


एकबारगी चीखे बिना नहीं रहा गया

कि ऐसी ही कविता लिखनी है मुझे।

Those who came before me wrote poems

I tried

And learned that

The darknss in which I dwell

Does not allow poetry.

I was angry and I burnt

All the books that I could find.


A voice kept reaching me 

From the burning papers

That poetry does not grow

Where Love does not exist.

I tried to imagine

The prettiest woman in the world

She appeared, a skeleton

With dark blood on her lips

I tried to see her smile

Venom fangs appeared as she opened her lips

She ate sheets of paper

With poems written on them.

Then I thought of writing a poem on her insanity

That I would take her clothes off and

And see her breasts and her behinds

But her body was filled with thorny hair


And for once I could not help screaming

That this is the poetry I write.

Sunday, January 08, 2017

16. तुम सिर्फ उत्पाद हो



इधर कुछ समय से मेरी ज़ुबान पर

जिन्हें पहले हराम कहता था ऐसे अल्फाज़

अनचाहे ही आते हैं

कत्ल और दंगा-फसाद ही नहीं

खारिज किसी दुनिया से वापिस आए अनेकों लफ्ज़

रस-बस गए हैं ज़ुबान पर


याद है कि अपने आका तक

पहुँचने के लिए कभी अपने मातहतों से कहा था कि

कातिलों को कुछ देर खेल खेल-लेने दो

आज तक इक्के-दुक्के लोग कोशिश में हैं

कि अंतरिक्ष में ध्वनि की गति से ज्यादा तेजी से दौड़ कर

उन लफ्ज़ों को पकड़ लें

भोले बेचारों को समझ नहीं आई है

कि अंतरिक्ष में हर दिशा में

खड़े हैं कराल द्वारपाल

क्षितिज झुका बैठा मेरे आका के पैरों पर

नवजात बच्चों के माथों पर चिरंतन दासता का भवितव्य

लिखा जा रहा है


भूल जाओ कि कभी तुमने सपनों में फूल देखे थे

तुम सिर्फ उत्पाद हो

और-और उत्पाद का स्रोत बन जीते रहना तुम्हारी नियति है।


For a while now words that I hated earlier

Come out of my mouth

Without my asking;

Not just murder and mayhem

Many words from some world rejected

Are part of my vocabulary


I remember that to conect with my master

I had told my subordinates

That the killers be allowed to play the game for a while

There are a few who to this day

Think of flying with a speed greater than of sound

And catching the words

Poor fellows do not realise

That in all directions in space

There stand the gatekeeping monsters

The horizons bow to my master

And the newly born are being destined

For slavery forever.


Forget it that you dreamt of flowers once

You are a mere product

It is your destiny that you will live to be source of even newer products.

Saturday, December 31, 2016

15. मैं कानून हूँ

जहाँ जाता हूँ
 

साथ होती एक स्याह चादर
 

धरती की परिक्रमा कर रहा हूँ
 

समूची धरती पर फैल रहा स्याह रंग
 

कोई कानून मुझे नहीं रोक सकता
 

दीगर मुल्कों में सहचर
 

मुझसे सीख रहे हैं गुर
 

स्याह चादरें दिखने लगी हैं धरती के हर कोने में

 

भूख धधक रही धरती पर हर ओर
 

कोई घास फूस खाता है
 

कोई प्यासा मर जाता है
 

हम स्याह साथ लिए चलते हैं
 

हमें अँधेरे की भूख है
 

हम अँधेरे में जीते हैं
 

अँधेरा खाते-पीते हैं
 

हमारा मकसद अँधेरे से धरती को ढँक लेना है

 

कई डॉक्टर, वैज्ञानिक, चिंतक, परेशान हुए
 

पर वे अकेले पड़ते जा रहे हैं
 

धीरे-धीरे हर कोई हमारे घेरे में आ रहा है

 

कानून की पकड़ क्या होती है
 

मैं ही कानून हूँ।

 

Wherever I go
 

A gloomy canopy accompanies me
 

I am out on globetrotting
 

A colour of gloom spreads across the skies
 

I am not restrainable by law
 

Fellow-travellers in several other countries
 

Are learning skills from me
 

And gloom canopies spread across all the skies

 

Hunger burns across the globe
 

They eat the weeds
 

They die of thirst
 

We carry gloom
 

We are what the darkness craves for
 

We live in dark
 

We thrive on darkness
 

We aim to engulf the Earth in darkness

 

Wise folks, the doctors and the scientists, are worried
 

But then who cares for them
 

We will catch all of them

 

Who cares for the law
 

I am the law.