Thursday, November 24, 2005

अभी ब्रेक चलेगा

कल लुधियाना, परसों अबोहर।
इसलिए फिलहाल ब्रेक चलेगा।
शायद रविवार को वापस वक्त मिले।
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भारत में जी

बायोटेक्नोलोजी, फेनोमेनोलोजी, ऐसे शब्द है जिनमें आखिर में जी आता है ।
ऐसे शब्द मिलकर गीत गाते हैं । शब्द कहते हैं बैन्ड बजा लो जी।
इसी बीच भारत बैन्ड बजाता हुआ चाँद की ओर जाता है।

चाँद पर कविता उसने नहीं पढ़ी।
भारत को क्या पड़ी थी कि वह जाने चाँद को चाहता है चकोर।
भारत ने चाँद जैसे सलोने लोगो से कह दिया
– ओ बायोटेक्नोलोजी, बैन्ड बजा लो जी।
ओ चाँद बजा लो जी, ओ फेनोमेनोलोजी ।

चाँद जैसे लोगो ने कहा – हड़ताल पर जाना देशद्रोह है।
चाँद उगा टूटी मस्जिद पर। ईद की रात चाँद उगा ।
हर मजलूम का चाँद उगा ।
भारत में। जी।

(फरवरी-२००३; पश्यंती- २००४)

2 comments:

mysterouge said...

i like the bharat poem a lot because it does have deep significance and also like i like how you refer to the moon being the aspiration of the Indians and all... except then I didn't understand when Eid and Muslims came into it... anyway...
also those chhoti e's really are acting weird... but otherwise it's great... but I'm not used to seeing all the half letters with the halank (is that what it is? i forgot... help....) beneath them.
also, what on earth is phenomenology? is that what you said? that sounds weird.... very very weird.
actually I always like your poems and am a hopeless critic and anyway why would I criticise your poems since they are so good. so yeah.

आलोक said...

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