Tuesday, August 11, 2015

देखो उसे, कोई माँग लो मन्नत


आज अच्छी खबर यह आई कि मुंबई की अदालत ने सी बी आई को खरी खरी सुना दी और तीस्ता को थोड़ी राहत मिल गई। इस खुशी में सेरा टीसडेल की तीन और कविताएँ - 'सदानीरा' के ताज़ा अंक में प्रकाशित:

The Answer

When I go back to earth
And all my joyous body
Puts off the red and white
That once had been so proud,

If men should pass above
With false and feeble pity,
My dust will find a voice
To answer them aloud:
“Be still, I am content,

Take back your poor compassion,
Joy was a flame in me
Too steady to destroy;
Lithe as a bending reed
Loving the storm that sways her—

I found more joy in sorrow
Than you could find in joy.”
जवाब
जब मैं धरती पर वापस जाऊँ

और मेरा सारा मदहोश जिस्म

लाली और सफेदी त्याग दे

जिस पर कभी गरूर था,


'गर झूठी सतही करुणा लिए

मेरे ऊपर से लोग गुजरें,

बुलंद जवाब होगा

मेरी खाक का उनको:

"खामोश, मैं खुश हूँ,


वापस लो अपनी दरिद्र करुणा

ख़ुशी मुझमें लौ-सी मौजूद थी

और इतनी मजबूत कि कोई उसे बुझा न सके;

मुड़ती कंडे सी लचीली

बहलाती हवाओं को प्यार करती -


जितनी खुशी मिलती है खुशी में तुम्हें

उससे कहीं ज्यादा मिली ग़म में मुझे ।"

There Will Come Soft Rains

(War Time) 
There will come soft rains and the smell of the ground,
And swallows circling with their shimmering sound;

And frogs in the pools singing at night,
And wild plum trees in tremulous white,

Robins will wear their feathery fire 
Whistling their whims on a low fence-wire;

And not one will know of the war, 
not one Will care at last when it is done.

Not one would mind, neither bird nor tree
If mankind perished utterly;
And Spring herself, when she woke at dawn,
Would scarcely know that we were gone.

आएँगी हल्की बुहारें 
(यह कविता रे ब्रैडबरी की कहानी में है - जिसका अनुवाद मैंने किया था जो 1996 में 
साक्षात्कार में छपा था)

आएँगी हल्की बुहारें,ज़मीं महकेगी,
अबाबीलें तीखी चहकती आकाश में चक्कर लगाएँगीं;

रात को पोखर में में गाते दादुर होंगे
काँपती सफेदी में जंगली आलूबुखारे होंगे,
आग-से धधकते पंख लिए रॉबिन पाखी होंगे
निचली बाड़ों पर बैठ मनमाफिक सीटियाँ बजाते होंगे;
किसी को नहीं पता होगा कि एक जंग छिड़ी थी,
कोई नहीं जानेगा आखिर जंग रुक जाएगी जब
किसी को फर्क नहीं पड़ेगा, न पंछी न पेड़ों को
आदमजात हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी जो

और खुद बहार जब सुबह जागेगी
बेखबर होगी न रहने से हमारे। 

The Falling Star

I saw a star slide down the sky, 
Blinding the north as it went by,
Too burning and too quick to hold,
Too lovely to be bought or sold,
Good only to make wishes on
And then forever to be gone.
गिरता तारा
देखा मैंने आस्मां में यूँ फिसला इक तारा,
गुजरा उत्तर को चौंधियाता वह,
तीखी चौंध और बड़ी जल्दी नज़रों से भागा 
इतना प्यारा था कि बेचा जाए न खरीदा,
बस देखो उसे, तो कोई माँग लो मन्नत,
और अलविदा कहना भी उसका मान लो।


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