Thursday, March 26, 2015

इस तरह लिखी अश्लील कविता मैंने


अश्लील कविता

पैड, दस्ताने, हेलमेट
जवान लड़के
वाकई जंग

वाजिब
लोगों की बातों में जुम्ले
क्रिकेट
क्रिकेट क्रिकेट
एकबार साथ छिड़ी पुरानी भी जंग
एक जंग और 
और एक जंग 
में छिड़ी जंग 
असली जंग

अखबार टी वी वेबसाइट इंटरनेट 
लोगों ने जम कर लड़ी  जंग

ऐसे ही वक्त देखा मैंने
चीथड़ों से झलकता उसका सूखा जिस्म
बदरंग।

इस तरह लिखी अश्लील कविता मैंने।
अश्लील। 

कविता को कहानी बनाते हुए मैंने
चार्ट बनायाः

क्रिकेट क्रिकेट क्रिकेट – जंग                  जिस्म सूखा चीथड़ों में - जंग
पुरानी  जंग – जंग                               मेरी चाहत - जंग
जंग और जंग में जंग - जंग                    तात्कालिकता - जंग

अश्लीलता की वरीयता में इन जंगों को
सजाओ प्रश्न
सोचा मैंने आलोचना के प्रश्नपत्र के लिए 
और कागज कलम समेट लगा जरुरी काम में।
                                               ---(जनसत्ता - 2012)


1 comment:

अकबर महफ़ूज़ आलम रिज़वी said...

वर्तमान को उसके तमाम प्रसंगों और संदर्भों के साथ बेपर्दा करने की कोशिश का परिणाम है यह अश्लील कविता। यह उस सभ्य और सुसंस्कृत समाज की सभ्य भाषा और सुसंस्कृत कविता से अधिक पवित्र और श्लाघ्य है।