Sunday, September 21, 2014

उसे भी सपने आते हैं


आबादी बढ़ रही है आवाज़ों की


जिससे मिलना है उसकी आवाज़ से मिल चुका हूँ
क्या वह वैसा ही होगा जैसी उसकी आवाज़ है
आवाज़ में उत्तेजना है
आदमी नीले आसमान के कोने में उठता हुआ
बादल का टुकड़ा हो सकता है
यह अधेड़ की उत्तेजित आवाज़ है
इसमें सदियों तक हारते रहने का अहसास है
उसे भी सपने आते हैं
एक सुनी हुई आवाज़ से मिलने के
दिन ऐसे आ गए हैं कि हो सकता है
हम कभी न मिलें और
हमारी आवाज़ें मिलती रहें
आबादी बढ़ रही है दुनिया में आवाज़ों की।

(
नया ज्ञानोदय- 2009; 'सुंदर लोग और अन्य कविताएँ' में संकलित)

फाइल में नया ज्ञानोदय देख रहा हूँ, पर स्मृति में वागर्थ है। खैर,...

1 comment:

Kamal Choudhary said...

Kya pakda hai Sir ...Vaah !