tag:blogger.com,1999:blog-18449440.post7253584970742018407..comments2008-02-15T23:08:15.141-08:00Comments on आइए हाथ उठाएं हम भी: साथ रह गए कभी न छूटने वाले इन घावों मेंलाल्टूhttp://www.blogger.com/profile/04044830641998471974noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-71454631939463203322008-02-15T23:08:00.000-08:002008-02-15T23:08:00.000-08:00one word "wow". It was beautiful. My fav. lines" छ...one word "wow". It was beautiful. My fav. lines<BR/>" छायाचित्रों में तुम नहीं तुम्हारी पगड़ी का होना न होना देखा<BR/>और हमने जाना कि यह वक्त तुम्हें नहीं तुम्हारे नाम को याद रखता है"<BR/><BR/>"बूँद जो अब होंठों पर खारापन ला चुकी है<BR/>उँगलियों से उसे समेटता हूँ"<BR/><BR/>"और फिर या तो जादूगरों की जंजीरों में गला बँधवा लेता है<BR/>या दृष्टिहीन छायाओं में खो जाता है"ojashttp://www.blogger.com/profile/11042946475121010036noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-30268609025885515362008-02-06T21:03:00.000-08:002008-02-06T21:03:00.000-08:00"हमारे वक्त में दुनिया बदलती नहीं किसी को आने जाने..."हमारे वक्त में दुनिया बदलती नहीं किसी को आने जानें से/चिताएँ, हंसी मजाक, दूरदर्शन, खेल कूद/सब चलते रहते हैं "सही कहा आपनें, यह बात एक हद तक स्वीकार तो की जा सकती है कि पश्चिमी सभ्यता के आने से ग्रामीण सभ्यता उजड़ रही है ,पर जब हंसी मजाक, खेल कूद, इस समय भी हमारे साथ हैं जैसे कि पहले थे तो आख़िर वो संवाद और वो वातावरण आज हमारे बीच क्यों नहीं आ रहे हैं,जो कुछ समय पहले थे। गाँव की छाया पानें को उद्द्यत हर शहरी की आत्माएं हाही कह रही है, जिस प्रसंग को आपनें अपनी इस भावबोध कविता में उठाया है ।anilpandeyhttp://www.blogger.com/profile/05876319724339061912noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-61675610761203430802008-02-03T10:23:00.000-08:002008-02-03T10:23:00.000-08:00very good poemvery good poemvipin-choudharyhttp://www.blogger.com/profile/05090451479975418329noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-1630499501613236082008-01-17T00:39:00.000-08:002008-01-17T00:39:00.000-08:00तमाम मायावी झंडों के बीच आज़ाद लहरा रही है मेरी स्...तमाम मायावी झंडों के बीच आज़ाद लहरा रही है मेरी स्मृति<BR/>vaah kya baat hai.Arun Adityahttp://www.blogger.com/profile/11120845910831679889noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-14476865381342045832008-01-14T13:20:00.000-08:002008-01-14T13:20:00.000-08:00बहुत खूब!बहुत खूब!Anikethttp://simplyani.wordpress.comnoreply@blogger.com