tag:blogger.com,1999:blog-18449440.post1946490151639608057..comments2008-02-01T21:45:21.674-08:00Comments on आइए हाथ उठाएं हम भी: ये लोग न हों तो मेरा जीना ही संभव न हो।लाल्टूhttp://www.blogger.com/profile/04044830641998471974noreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-14887402676400671222008-02-01T21:45:00.000-08:002008-02-01T21:45:00.000-08:00आप बहाने करते हैअपने दोस्तों के साथयाहकीकत कहते है...आप बहाने करते है<BR/>अपने दोस्तों के साथ<BR/>या<BR/>हकीकत कहते हैं<BR/>इस आधुनिक युग में<BR/>डायरी खो जाए<BR/>किसी को विश्वाश नही होता है।उमेश कुमारhttp://www.blogger.com/profile/07389145645230909477noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-20446542968414169772007-12-11T07:55:00.000-08:002007-12-11T07:55:00.000-08:00हिसाब किताब न भी बराबर हो और देर ही सही टेलीपैथी ज़...हिसाब किताब न भी बराबर हो और देर ही सही टेलीपैथी ज़िंदाबाद और बधाई !Pratyakshahttp://www.blogger.com/profile/10828701891865287201noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18449440.post-89837678298745495432007-12-11T07:27:00.000-08:002007-12-11T07:27:00.000-08:00लाल्टू जी, माफ कीजिएगा। आप इतना पहले और इतना अच्छा...लाल्टू जी, माफ कीजिएगा। आप इतना पहले और इतना अच्छा लिखते हैं, लेकिन मुझे पता ही नहीं चला। आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया। एक-दो पोस्ट देखी। आपकी संवेदनशीलता काबिले-तारीफ है। इस पोस्ट में टेलीपैथी वाली बात में गजब की पीड़ा है।अनिल रघुराजhttp://www.blogger.com/profile/07237219200717715047noreply@blogger.com